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राजस्थान के दुर्गों का संक्षिप्त इतिहास

1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग

चित्तौड़गढ़ दुर्ग के लिए इमेज परिणामचित्तौड़गढ का किला राज्य के सबसे प्राचीन और प्रमुख किलों में से एक है यह मौर्य कालिन दुर्ग राज्य का प्रथम या प्राचीनतम दुर्ग माना जाता है।
अरावली पर्वत श्रृखला के मेशा पठार पर धरती से 180 मीटर की ऊंचाई पर विस्तृत यह दुर्ग राजस्थान के क्षेत्रफल व आकार की दुष्टी से सबसे विसालकाय दुर्ग है जिसकी तुलना बिट्रीश पुरातत्व दुत सर हूयूज केशर ने एक भीमकाय जहाज से की थी उन्होंने लिखा हैं-
"चित्तौड़ के इस सूनसान किलें मे विचरण करते समय मुझे ऐसा लगा मानों मे किसी भीमकाय जहाज की छत पर चल रहा हूँ"
चित्तौड़गढ दुर्ग ही राज्य का एकमात्र एसा दुर्ग है जो शुक्रनिती में वर्णित दुर्गों के अधिकांश प्रकार के अर्न्तगत रखा जा सकता है। जैसे गिरी दुर्ग, सैन्य दुर्ग, सहाय दुर्ग आदि।

2. अजयमेरू दुर्ग(तारागढ़)

अजयमेरू दुर्ग(तारागढ़) के लिए इमेज परिणामबीठली पहाड़ी पर बना होने के कारण इस दुर्ग को गढ़बीठली के नाम से जाना जाता है।
यह गिरी श्रेणी का दुर्ग है। यह दुर्ग पानी के झालरों के लिए प्रसिद्ध है।
इस दुर्ग का निर्माण अजमेर नगर के संस्थापक चैहान नरेश अजयराज ने करवाया।
मेवाड़ के राणा रायमल के युवराज (राणा सांगा के भाई) पृथ्वी राज (उड़ाणा पृथ्वी राज) ने अपनी तीरांगना पत्नी तारा के नाम पर इस दुर्ग का नाम तारागढ़ रखा।
रूठी रानी (राव मालदेव की पत्नी) आजीवन इसी दुर्ग में रही।
तारागढ़ दुर्ग की अभेद्यता के कारण विशप हैबर ने इसे "राजस्थान का जिब्राल्टर " अथवा "पूर्व का दूसरा जिब्राल्टर" कहा है।
इतिहासकार हरबिलास शारदा ने "अखबार-उल-अखयार" को उद्घृत करते हुए लिखा है, कि तारागढ़ कदाचित भारत का प्रथम गिरी दुर्ग है।
तारागढ़ के भीतर प्रसिद्ध मुस्लिम संत मीरान साहेंब (मीर सैयद हुसैन) की दरगाह स्थित है। 

3. तारागढ दुर्ग(बूंदी)

तारागढ़ दुर्ग(बूंदी) के लिए इमेज परिणामइस दुर्ग का निर्माण देवसिंह हाड़ा/बरसिंह हाड़ा ने करवाया।
तारे जैसी आकृति के कारण इस दुर्ग का नाम तारागढ़ पड़ा।
यह दुर्ग "गर्भ गुंजन तोप" के लिए प्रसिद्ध है।
भीम बुर्ज और रानी जी की बावड़ी (राव अनिरूद्ध सिंह) द्वारा इस दुर्ग मे स्थित हैं
रंग विलास (चित्रशाला) इस दुर्ग में स्थित हैं।






4. रणथम्भौर दुर्ग(सवाई माधोपुर)
रणथम्भौर दुर्ग(सवाई माधोपुर) के लिए इमेज परिणामसवाई माधोपुर शहर के निकट स्थित रणथम्भौर दुर्ग अरावली पर्वत की विषम आकृति वाली सात पहाडि़यों से घिरा हुआ एरण दुर्ग है। यह किला यद्यपि एक ऊँचे शिखर पर स्थित है, तथापि समीप जाने पर ही दिखाई देता है। यह दुर्ग चारों ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ है तथा इसकी किलेबन्दी काफी सुदृढ़ है। इसलिए अबुल फ़ज़ल ने इसे बख्तरबंद किला कहा है। इस किले का निर्माण कब हुआ कहा नहीं जा सकता लेकिन ऐसी मान्यता है कि इसका निर्माण आठवीं शताब्दी में चौहान शासकों ने करवाया था।

5. मेहरानगढ़ दुर्ग(जोधपुर)

राठौड़ों के शौर्य के साक्षी मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव मई, 1459 में रखी गई।
मेहरानगढ़ दुर्ग(जोधपुर) के लिए इमेज परिणाम
मेहरानगढ़ दुर्ग चिडि़या-टूक पहाडी पर बना है।
मोर जैसी आकृति के कारण यह किला म्यूरघ्वजगढ़ कहलाता है।

दर्शनिय स्थल




1.चामुण्डा माता मंदिर -यह मंदिर राव जोधा ने बनवाया।
1857 की क्रांति के समय इस मंदिर के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण इसका पुनर्निर्माण महाराजा तखतसिंह न करवाया


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